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फिर क्या होगा उसके बाद { संस्मरण }
फिर क्या होगा उसके बाद !!

गुज़रते गुज़रते ज़िन्दगी मेरी अब इस पड़ाव पर आ पहुंची है के बचपन की यादों का गुलदस्ता अचानक से ख्यालों के दरवाज़े पर दस्तक दे गया है।
इन गुल्दस्तों को देखा तो मन खिलखिला उठा और अचानक मेरी नज़र का ध्यान जा पहुंचा एक याद की फूल पर, वही प्रश्न जिसने मुझे बचपन में बहुत असमंजस में डाला था।
हर वक्त जब मैं इस बारे में सोचता तो बस सोचता ही रह जाता था।
हैरानी के बादल मेरे छोटे से मस्तिष्क रूपी फ़लक पर छा जाते, हर बार स्तब्ध रह जाता। ये अड़चन और भी कई तरह के सवालों से रही है मुझ में,
खैर हम तो एक सीमित दायरे में ही सोच सकते हैं सो जितना सोच पाता उसी से मैं संतुष्ट हो जाता ।

लेकिन इस प्रश्न का जवाब शायद शब्दों में नहीं दिया जा सकता है , लोग कई तरह के जवाब दे देंगे लेकिन वह वास्तविकता की कसौटी पर खरे नहीं उतरेंगे। क्योंकि कुछ प्रश्नों के उत्तर पाने के लिए हम कितना ही अथक प्रयास क्यूँ न कर ले लेकिन वह प्रयास सदा असफलता को ही प्राप्त होंगे।
और अब लगता है कि यही तो आनंद है यही तो मज़ा है और यही तो कारण है कि हम जीवित हैं। जीवित रहते हर प्रश्न को हम सुलझा लें, हर उत्तर को हम खोज लें ऐसा ज़रूरी तो नहीं। और किसी ने ठीक ही कहा है के
" मिल ही जाएगा जब जीवन में सब तो तमन्ना किसकी करोगे !!
कुछ अधूरी ख्वाहिशें ही तो जीने का मज़ा देती हैं

प्रश्न मेरे ज़हन में ये उठता था कि जब यहां कुछ नहीं था तब क्या था और जब यहां कुछ नहीं होगा तब क्या होगा??

शायद पहली बार में आपको यह प्रश्न बहुत हल्का मालूम पड़ सकता है। लेकिन गहन ध्यान से विचार करिए ज़रा यह वाकई में गहरा प्रश्न है और यह प्रश्न मुझे जब से मैं तकरीबन 9 या 10 वर्ष का था तब से परेशान कर रहा है।
जैसे हम सब में एक उत्सुकता होती है यह जानने की के हम यहां क्यों हैं?? क्यों यह जीवन है ??

हर दिन आज लगभग ढाई से तीन लाख लोग मौत की नींद में सो जाते हैं।
और हर दिन लगभग तीन से साढे तीन लाख नवजात शिशु इस धरती पर जन्म लेते हैं।
ये आँकड़े इतने ज़्यादा इसलिए हैं क्योंकि हम यह जानते हैं कि आज हम 21वी सदी के तीसरे दशक के तीसरे वर्ष में खड़े हैं ।
हर रोज़ इतना कुछ देख कर भी हम इंसानों का सबसे बड़ा आश्चर्य यही है कि हम फिर भी जीना चाहते हैं।
यह जानते हुए भी कि यहां कुछ भी निश्चित नहीं है।
ये मौत का अजगर जो हर दिन 3 लाख लोगों को निगलता है ,ये हम में से किसी को भी कभी भी डस सकता है।
यहां कुछ भी निश्चित नहीं है और हम निहत्थे हैं।
हमारे हाथों में धैर्य के साथ इंतज़ार करने के सिवाय कुछ भी नहीं है।

विज्ञान में मैंने पढ़ा है कि आज से लगभग 13 अरब वर्ष पहले बिग बैंग की थ्योरी के अनुसार एक महा विध्वंसक विस्फोट हुआ था जिससे हमारी यह मिल्की वे गैलेक्सी बनी और 5 अरब वर्ष पहले हमारा सूर्य बना और उसके इर्द-गिर्द घूमते 8 ग्रह बने ।

जिसमें हमारी पृथ्वी सूर्य के बनने के 40 करोड़ वर्ष बाद अस्तित्व मे आयी।

और 40 लाख साल पहले चिमपैंज़ि से आदिमानव बने।
और इतने साल बाद आज हम महा आधुनिक दौर में जी रहे हैं, शायद कई अनसुलझे रहस्यों के बेहद करीब , इतने के लगभग अगले 50 वर्षों में हम बहुत कुछ जान जाएंगे जिस पर कि अब तक प्रकृति ने पर्दा डाला हुआ है।

लेकिन इन सब में क्या मेरे प्रश्न का जवाब मिल पाएगा ??
यह ब्रह्मांड नहीं था तब उसके पहले क्या था ?
फिर क्या हुआ यह पृथ्वी आई !!
फिर क्या हुआ हम आये !!
फिर अब क्या होगा शायद यह धरती भी नहीं रहेगी !!
फिर क्या होगा उसके बाद ??

यह सिलसिला कब तक चलेगा?
कब से शुरू हुआ था?
कहां जाकर रुकेगा?
और फिर उसके बाद भी क्या होगा?
और जो होगा वो क्यों होगा??

भटक रहा है यह विचार बहुत समय से
कदाचित कण कण मे सभी के!!
शायद ये पूरी धरती का सवाल है !!

कि फिर क्या होगा उसके बाद!!??
© sidd