...

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🙃🙂💔💔
बोली यहीं तक साथ था अपना अब दूर होने की बारी है,🙃
पर तेरे बिना मैं जियूं कैसे यही चिंता भारी है,🙃
तेरे साथ रह न पाई पर आत्मा से तेरी हूं,🙃
कहां छोड़ के राजी हूं मजबूरियां से घेरी हूं,🙃
बाप के सर की इज्जत हूं और बाप का मैं अभिमान हूं,🙃
न छोड़ के उनको आ सकती यार दो भाइयों की जान हूं,🙃
अलग अलग राह हो जाएं तेरी सुंदर लड़की से व्याह हो जाए,🙃
पर कभी कभी समय निकाल कर निर्भाग से मिलने आ जाना,🙃
तू भी दूल्हा बन जाएगा तेरे सर पे सहरा चढ़ जाएगा,🙃
मैं तुझे देखने छत पर आऊं तू भी गली में दिखने आ जाना,🙃

मैने कहा 🙂

क्यों ढोंग करे मजबूरी का बता कौन सी बात का हल नहीं है,🙂
मैने सच्चे दिल से चाहा है मेरे प्यार में बिल्कुल छल नही है,🙂
तेरे घर के मेरे भी हैं मुझे भी इज्जत प्यारी है,🙂
बैठ के बात कर लेते बताओ कौन सी गलती हमारी है,🙂
पर तू खुद छोड़ के राजी है न घर वालों पर इल्जाम धरे,🙂
औलाद के सुख में सुख है उनका झूठा न बदनाम करे,🙂
बस एक गुजारिश तुझसे है मेरी हर एक निशानी फेंक दिए,😐
मेरी अर्थी जाएगी तेरी गली से जी भर के तू देख लिए।🥺


© Mayank Rav