...

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ख़ामोश इश्क़
पहलेपहल कितना शोर करता है
अब ख़ामोश इश्क़ है
प्यार का गहरा सागर बहता है
अब समंदर ख़ुश्क है

ख़्वाब ख्वाहिशें न जाने कितने रँग
अरमान दिल में भी कितने जगे
आँखे बोलती थी चाहत की बातें
अब सुर्ख अश्क़ है

शिकवे गीले कितनी तोहमतें
दौर मुहोब्बत का किस ओर चला
'प्रीत ' न जाने रस्म-ए-उल्फत
अब शबभर रश्क़ है
© speechless words