...

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तेरा मेरा मिलना
तेरा मेरा मिलना नसीब में था शायद ,
वरना मिलों के फासले पलों में कहाँ मिटते हैं!
तेरी आँखों की गहराइयाँ,
तेरी बातों का सरूर,
वो हंस कर शर्मना,
और दबी आवाज में अपनी बात कह जाना,
हर अदा सीने में दफ़न रहेगी राज़ की तरह!

बस इतनी सी अर्ज़ है खुदा से,
दुनिया की सारी खुशियाँ तुझे नसीब हो,
जिन्हे तू चाहे वो तेरे करीब हो,
गम के बदल ना चाहिए तुझ पर
आसमा से ऊँची तेरी तकदीर हो।

समुंदर से गहरा तुझे खोने का डर,
चाँद के जैसा तुझे पाने की चाहत,
मोहब्बत में तेरी खो जाने की ख्वाहिश,
सच को ना भूल पाने का मलाल,
कुछ इस कदर है दिल पे तेरा इख्तियार!
© AB14

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