...

8 views

मां कह एक कहानी
`मां कह एक कहानी
राजा था या रानी।
मां कह एक कहानी।
तू है हटी मानधन मेरे,
सुन उपवन में बड़े सवेरे।
तात भ्रमण करते थे तेरे,
जहा सुरभि मनमानी।
जहा सुरभि मनमानी।
हा।मा यही कहानी।
` वणं-वणं‌ के फूल खिले थे,
झलमल कर हिम बिंदु मिले थे।
हलके झोके हिले–मिले थे ।
लहराता था पानी।
लहराता था पानी।
हा–हा यही कहानी ।
गाते थे खग कल–कल सवेरे से,
सहसा एक हंस ऊपर से,
गिरा विद्ध होकर खर शर से
हुई पक्ष की होनी।
`हुई पक्ष की होनी।
करुणा भरी कहानी।
`चौक उनोने उसे उठाया,
नया जन्म सा उसने पाया।
इतने में आखेतक आया।
लक्ष्य सिद्धी का मानी।
लक्ष्य सिद्धी का मानी।
कोमल कठिन कहानी।
मागा उसने आहत पक्षी।
तेरे तात किंतु थे भक्षी।
हठ करने की ठानी।
हठ करने की ठानी।
अब बड़ चली कहानी
हुआ बीबाद सदर–निदर में,
उवय आग्रही थे सर विजय में ,
गई बात तब न्यालय में,
सुनी सभी ने जानी।
सुनी सुभी ने जानी।
वपायक हुई कहानी।

© Kartik dubey