कहाँ है वो मोहब्बत
गर्मी के मौसम में चांदनी रात बहुत सुहानी थी छत के ऊपर अकेले में नजारे देखनाबहुत अच्छा लगता है शायद हर दिल को ही रात में साफ सुधरे आकाश तैरता चंद्रमा कही कही दूर चमकते सितारे कभी कोई हल्का बादल उन्हें अपनी आगोश में ले लेता कुछ दूर बगीची से सुहानी हवा के झोंके आ रहे थे और कहीं दूर से मीठी मीठी संगीतलहर मौसम को और भी सुहाना बना रही थी कितना अच्छा मौसम है दिल भी न जाने कितनी बातें कह रहा था कभी सुहानी चांदनी रात और कभी संगीत लहर में दिल डूब जाता मेरा दिल संगीत सुनने को कह रहा था मैंने रेडियो ऑन किया शिव कुमार बटालवी जी का लिखा गीत चल रहा था नीचे कोई खड़क हुआ मेरा मन इस संगीत में इतना खो गया था कि मैंने हिम्मत नहीं की कि मैं नीचे जाकर...