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संबोधन अंतिम दिपक की शक्ति।।
इस ग्रंथ का पद -परिचय ही शमशान में विराजमान हैं घोषित करार दिया गया था।।
इसलिए इस गाथा में वह सिर्फ शवगामिनी में ही एकमात्र आखिरी मन्तव्य व विकल्प में बुनियादी ए ईमारत घोषित करार दी गई थी।।और वह वहीं थी जो शिव द्वितीय होकर रोगिन श्रेणी में व्याप्त होकर प्रथम भाग में स्थित सिद्ध घोषित करार होकर पूर्ण में संपूर्ण हो गई थी और वह पहले गावाचक के रूपांतरण में से उत्पन्न होकर सिद्ध घोषित करार होकर उन्हीं से प्रेम करते हुए उन्हीं द्वारा संचालित अवधि उनके शिव रूप अर्थात अमर सकंटी द्वारा कलि के कलियुग मे...