साथ कहा नसीब होता हैं
सुनो...
इक आदत ऐसी हुईं है उस चांद को देखने की
चांद आसमा में
और में ज़मी से घंटों उस चांद को तका
करतीं हूं
देखती हूं उस चांद को और उससे जुड़ी उस
चांदनी को जो चांद से जुड़ी...
इक आदत ऐसी हुईं है उस चांद को देखने की
चांद आसमा में
और में ज़मी से घंटों उस चांद को तका
करतीं हूं
देखती हूं उस चांद को और उससे जुड़ी उस
चांदनी को जो चांद से जुड़ी...