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एक मेरी मित्र हैं वह अब भी मुझे call करती हैं
and मुझे सच कहूँ बहुत गुस्सा भी आता हैं और थोड़ा बुरा भी लगता हैं..
मग़र फ़िर भी मैं दिल पर पत्थर रख कर उसका call नहीं उठाती हूँ..
दीप is no more a charger🔋🔌..
इतने वर्ष आपने power house होने का मौका गवा दिया सो गवा दिया..
अब दीप उपलब्ध नहीं..
हालाँकि वह मेरी बहुत प्रिय मित्र हैं..
मेरे दिल में उसके लिए बहुत प्यार हैं..
किंतु किसी को आपका प्यार प्राप्त हो
इसके लिए महज़ आपमें प्रेम का उपलब्ध होना काफ़ि नहीं हैं
सामने वाले की ग्राहकता भी महत्वपूर्ण होती हैं
और मैं वो मित्र नहीं जो मित्र की खुशी के लिए मित्र के ग़लत को सही कहूँ..
मेरी मित्रता कर्ण जैसी नहीं
कृष्ण जैसी होगी
आप जैसे हो आपके लिए मेरा रूप वैसा होगा..
यदि सुदामा हो..
अपना भी कुछ ना सोचूँगी
अपना भी सब लुटा दूंगी..
यदि अर्जुन हो..
बार बार तुम्हें रोकूंगी
टोकुंगी...
भिन्न तरीके से तुम्हें संझाऊँगी..
कभी सारथी होके
तो कभी शस्त्र उठाके..
कभी वचन तोड़कर
तो कभी वचन निभा कर..
तुम कौन हो तुम्हें समझाऊंगी
यदि तुम अर्जुन हुए तुम्हें अंतिम तक ले जाऊंगी..
बस जैसे तुम हो वैसी ही आपके लिए मैं हूँ..
यदि आप सुदामा नहीं बन सकते
अर्जुन नहीं बन सकते...
माफ़ करना आप मेरे कितने ही प्रिय मित्र क्यों नहीं
कृष्ण की संपदा आपको दुर्लभ हैं..
मेरे पास जो हैं कृष्ण का हैं..
जो कृष्ण को प्रिय वो मुझे प्रिय 😊।
अब जो तुम हो
तुम्हारे लिए मैं वही हो जाऊंगी।
और जिनके लिए मेरे से महत्वपूर्ण उनका अहम हैं
तो वे रख दें अपने अहम को संभाल कर
उन्हें मैं छेड़ऊँगी भी नहीं।
1.25pm
18.2.2025