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ना जज्बात समझे जाते हैं,
ना हालात समझे जाते हैं,
ये दौर नहीं भरोसे का,
यहाँ सिक्कों की खनक पे अपने पराये, और पराये अपने समझे जाते हैं।
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ना जज्बात समझे जाते हैं,
ना हालात समझे जाते हैं,
ये दौर नहीं भरोसे का,
यहाँ सिक्कों की खनक पे अपने पराये, और पराये अपने समझे जाते हैं।