...

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आख़िर

तालीम की इतनी चमक!
रूतबा भी ख़ानदानी है।
पर बरकत जो नहीं होती;
ये नीयत की निशानी है।
ख़ूब अकड़ते बात-बात पे,
माल, दबदबा और ज़ात पे।
पर कितने बद्नीयत हैं;
बर्ताव से सब दुध-पानी...