ख़्वाइश
ख़्वाइश
क्या हासिल होगा ज़िन्दगी की उड़ान भरने से,
ख़्वाइश नहीं मेरी कि ऊंचे मकामो पे मैं चढूं ।
क्या मिलेगा जो दुनिया कि दौलत मिल भी जाएगी,
ख़्वाइश नहीं कि हाकिम बनके मैं किसिपे राज करूँ।
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क्या हासिल होगा ज़िन्दगी की उड़ान भरने से,
ख़्वाइश नहीं मेरी कि ऊंचे मकामो पे मैं चढूं ।
क्या मिलेगा जो दुनिया कि दौलत मिल भी जाएगी,
ख़्वाइश नहीं कि हाकिम बनके मैं किसिपे राज करूँ।
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