ummid ki Udan
कल्पनाओं की उड़ान.....
जब मैं ना रहूं या फिर तुमसे दूर रहूं ,तब तुम
नदी किनारे, पेड़ के घने छांव में जाकर बैठ जाना
और फिर, तुम गौर से नीले आसमान को देखना
हमारे प्रेम की लालिमा में डूबकर एकाएक
आसमां का गहरा सिंदूरी हो जाना, इस अद्भुत
एहसास को, आंखें बंद करके महसूस करना
भोर के द्वार का जब पहला पट खुलेगा,तब
तुम्हें मैं याद आऊंगी, बहुत याद आऊंगी
फिर सपनों के तिनके तिनके...
जब मैं ना रहूं या फिर तुमसे दूर रहूं ,तब तुम
नदी किनारे, पेड़ के घने छांव में जाकर बैठ जाना
और फिर, तुम गौर से नीले आसमान को देखना
हमारे प्रेम की लालिमा में डूबकर एकाएक
आसमां का गहरा सिंदूरी हो जाना, इस अद्भुत
एहसास को, आंखें बंद करके महसूस करना
भोर के द्वार का जब पहला पट खुलेगा,तब
तुम्हें मैं याद आऊंगी, बहुत याद आऊंगी
फिर सपनों के तिनके तिनके...