केसरिया सरकार
वृंदावन में होरी खेले केसरिया सरकार,
कहीं उड़े गुलाल लाल, कहीं पिचकारी की धार।
झूल रही है हौले-हौले, हर कदंब की डारी,
मस्ती में उन्मुक्त लहराए, उपवन की क्यारी-क्यारी।
कहीं लहराए धानी चूनर, कहीं लाल कचनार,
वृंदावन में होरी खेले केसरिया सरकार।
बहक रहे...
कहीं उड़े गुलाल लाल, कहीं पिचकारी की धार।
झूल रही है हौले-हौले, हर कदंब की डारी,
मस्ती में उन्मुक्त लहराए, उपवन की क्यारी-क्यारी।
कहीं लहराए धानी चूनर, कहीं लाल कचनार,
वृंदावन में होरी खेले केसरिया सरकार।
बहक रहे...