...

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दिल दिमाग की सुनता नहीं है
मिल लेता हूँ हर किसी से हर जगह
मसले बहुत हैं लोगों को मुझसे
मेरा तो सिर्फ एक ही मसला है
कि कोई मुझसे मिलता नहीं है

मैं बैठा हूँ तैयार हर पल सुनने को
हर कोई फुरसत में जो है
मेरी शिक़ायत बस एक है की
कोई मुझे इत्मीनान से सुनता नहीं है

होते मेरे पास भी उन जैसे सबकुछ
ऊंचाईयां आराम और नाम
पर मलाल बस एक है की
मेरा दिल, दिमाग की करता नहीं है

© रूपेन्द्र साहू "रूप"
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