...

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तेरे बग़ैर...
देखना, हम बिल्कुल भी न लड़खड़ाएगें तेरे बग़ैर
ज़ी ही रहे हैं और, कहीं मर नहीं जाएंगे, तेरे बग़ैर...

राहें छूटने की मायूसी, कुछ देर तक है ये जान ले
नए जोश से उठके फ़िर नई राहें बनाएंगे तेरे बग़ैर...

काफ़िला नहीं रुकता, किसी राही के छूट जाने से
हरगिज़ मंज़िल से अनछुए न रह जाएंगे, तेरे बग़ैर...

पहले भी तो मशगूल...