ना जाने..
ना जाने क्यों एक दिन सरगोशी में लिपटी खुद के साथ कुछ बात हुई,
ना जाने कब एक अर्से से चुप बैठी मेरी खामोशी से फिर एक मुलाक़ात हुई।
ना जाने क्यों...
ना जाने कब एक अर्से से चुप बैठी मेरी खामोशी से फिर एक मुलाक़ात हुई।
ना जाने क्यों...