दिल ये बेचैन हैं
दिल ये बेचैन हैं, तेरी यादों में,
ढुंढने लगे हैं अब हम तुम्हें, हमारे ख्वाबों में|
दिल ये धडकता हैं क्यों, देखते ही तुम्हें?
शायद, हर रोज तुम्हें देखने कि आदत हो गयी हैं अब हमें|
जब नजरों के सामने, नही होती हो तुम,
पता नही, ये दिल हो जाता हैं कही गुम|
रात के उस चांद में भी, बस...
ढुंढने लगे हैं अब हम तुम्हें, हमारे ख्वाबों में|
दिल ये धडकता हैं क्यों, देखते ही तुम्हें?
शायद, हर रोज तुम्हें देखने कि आदत हो गयी हैं अब हमें|
जब नजरों के सामने, नही होती हो तुम,
पता नही, ये दिल हो जाता हैं कही गुम|
रात के उस चांद में भी, बस...