चली चली रे पतंग
श्री गणेशाय नमः
चली चली रे पतंग
मेरी चली रे
उड़ी गणेशाय के संग
बिन डोर उड़ी मेरी पतंग
चली बादलों के पार
माँ के शेर पे सवार होके
चली रे
चली चली रे...
पहाड़ों पे आ
रुकी रुकी रे पतंग
मेरी रुकी रे
धाम माँ का देख रुकी रे
सुखी हुई पतंग
मेरी सुखी हुई रे...
चली चली रे पतंग
मेरी चली रे
उड़ी गणेशाय के संग
बिन डोर उड़ी मेरी पतंग
चली बादलों के पार
माँ के शेर पे सवार होके
चली रे
चली चली रे...
पहाड़ों पे आ
रुकी रुकी रे पतंग
मेरी रुकी रे
धाम माँ का देख रुकी रे
सुखी हुई पतंग
मेरी सुखी हुई रे...