...

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🚩तुम आरंभ हो, तुम अंत हो और तुम हीं अनंत हो🚩
जो सजग-सहज चलता रहे,
जिसका ना कोई आरंभ है,
ना कोई अंत है।
तुम दुर्निवार हो, तुम अनिवार्य हो।
तुम समीचीन हो, तुम हीं
कल्पनाशील हो,
तुम चारों दिशाओं में
गमनशील हो।
तुम अजेय हो,...