ग़ज़ल: बिन गुल गुलिस्तान है
बिन गुल गुलिस्तान है
दिल जैसे कब्रिस्तान है
ये फासला चाहतों का
यही इश्क़े इम्तिहान है
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दिल जैसे कब्रिस्तान है
ये फासला चाहतों का
यही इश्क़े इम्तिहान है
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