...

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बेनाम सी मोहब्बत...
मै बेनाम सी मोहब्बत जिये जा रही हू,
न जाने किस ओर अपनी किस्मत लिखे जा रही हु,

नुश्ख ए जमाना दुनियादारी सिखा रही है,
ख़ामोसी मेरा हाल पूछा करती है,
उनकी नजरे मेरे जख़्म सिये जा रहे है |

न जाने किस डगर पे चली जा रही हू,
मै बेनाम सी मोहब्बत किये जा रही हू |

कभी कभी वो बेगाने से लगते है,
उनकी बेरुखी मेरे जख्म खुरेदे जा रही है,

मै एक तरफ़ा इनायत् किये जा रही हू,
बेनाम सी मोहब्बत जिये जा रही हू|


© Ankita siingh