...

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प्रेम का इंतज़ार
बारिश कि बूंदो की आवाज़े
मेरे कमरे के खालीपन और सनाट्टो को भर रही थी

अध खुली खिड़की से कुछ बूँदे मेरी ओर भी लपकी
शायद कोशिश थी उनकी मेरे दरारों को भरने की

या

कोशिश थी उन दरारों से होकर मेरे उन हिस्सों तक पहुंचने की
जिन्हें सूरज की किरणों ने भी अछूत समझ लिया था

क्योंकि

सिर्फ बादलों ने ही देखा ओर समझा है
सूखी बेजान धरा की प्यास ओर इंतज़ार

उसी तरह

तुम भी मेरे प्रेम के इंतज़ार को समझ
बरस जाना किसी काले बेफिक्र मेघ की तरह

ताकि

मेरे सीने में खिलते हमारे प्रेम के पुष्प
किसी वादी को नहीं

बल्कि

हमारे घर के कोनों को महका सके!



# इंतज़ार
© Mystic Monk