...

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"बेनाम"
महसूस करते एकदुजे को,
जहाँ मीलों का फासला है।

तेरा मेरा साथ मालूम नहीं,
जो ना जाने कितने समय का है।

ख्वाहिश सिर्फ जी भर के देखने की,
जो मिले हम वो नसीब कहाँ है।

उन रिश्तों की उम्र नहीं,
जो बेनाम सरीके है!!
© सांवली (Reena)