सुनो, जवाब दो
सुनो,
क्या आज भी जब तुम फ़ोन की घण्टी सुनते हो,
तो पहला ख़्याल तुम्हें मेरा ही आता है।
क्या आज भी वो तुम्हारा डिब्बे वाला,
मेरे हिस्से का खाना लाता है।।
क्या आज भी सुबह-सुबह जब तुम उठ नहीं पाते,
तो हड़बड़ी में तुम्हें ठीक वैसी ही देर होती है।
क्या आज भी तुम्हारी अंगूठी में वही सफेद,...
क्या आज भी जब तुम फ़ोन की घण्टी सुनते हो,
तो पहला ख़्याल तुम्हें मेरा ही आता है।
क्या आज भी वो तुम्हारा डिब्बे वाला,
मेरे हिस्से का खाना लाता है।।
क्या आज भी सुबह-सुबह जब तुम उठ नहीं पाते,
तो हड़बड़ी में तुम्हें ठीक वैसी ही देर होती है।
क्या आज भी तुम्हारी अंगूठी में वही सफेद,...