...

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कमल सा कोमल.. निर्मल.. निश्छल।
मैं अक्सर कहती हूँ अपने प्रियजन से..

जगत में कमल की तरह रहों..
इतने खूबसूरत..😊!
इतने Glamours..
मालूम हो के
आपसे अधिक संसारी
जगत में कोई हैं नहीं
आपसे अधिक पार्थिव
जगत में कुछ हैं नहीं😊..
किंतु जिस कीचड़ में रहो
उस कीचड़ का कण भर भी तुम्हें छुए नहीं
यही महज़ खयाल रहे!😊...
तुम्हें अपने झूठ की ख़बर हो..
जगत का झूठ तुम्हारे सच से
तुम्हें ज़रा भी डग्मगाए नहीं...।
इस जगत में
सत्य...