...

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Good morning से Good night तक
पहले आंखे खुलने का इंतजार होता था नींद में भी ये ख्याल होता था की पहले Good morning किसी का होगा
अब आंखे खोल भी तो कैसे जब इंतजार लम्बा है
घड़ी आज भी है जिसको देख के अंदाजा लगाते थे आने का टाइम हो रहा है
शीशा भी वही है
टाइम हो गया है थोड़ा बालो को ठीक कर ले
चेहरा कैसा लग रहा है मुस्कान कितनी रखनी है
पर घड़ी और शीशा भी क्यू देखे इस बार इंतजार लम्बा है
नाराज होते थे देर से हाल पूछने पर
टाइम रहते ना संदेश देने पर
आज नाराज भी क्यू हो फिर दिन में 10 बार हाल पूछना जान कर 1 बार में भी की सब ठीक है अब वो इतनी लम्बी बाते कहा है
इस बार इंतजार लम्बा है
वो हसाना वो परेशान करना अब कहा है
बच्चो सी बाते करते करते खुद बच्चा बन जाना
कसमों रस्मो से भी ज्यादा की बाते कर जाना
हर दिन एक नया ख्वाब का दिल में आना
रोज एक अलग दिन बना के अपनी हर बातो को कह जाना बाट लेना सब दुख दर्द अब कहा है
इस बार इंतजार लम्बा है
सूरज के ठड़लते उनका आखों से हो कर गुजर जाना खुद को जिंदा होने का अहसास दे जाना
पल भर भी पास होना उनका अब कहा है
पूरे दिन का उनका रात में सब कहना समझना
अगले दिन भी हमारा ऐसा ही होगा उसका वादा करना हाल पूछना फिर Good Night कह के
मुझे सुलाना उनका
जैसे हम दोनो Good Night कहते उस पल से ही Good morning कहने का इंतजार करते
अब कहा उनसे इतना सब कह पाना

Good morning से Good night तक हमारा
हक जातना अब कहा
इस बार इंतजार लम्बा है

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