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शर्तीया चंदन..
#शर्त
चंदन को शर्त लगाना और फिर उसे जीतना बहुत पसंद था। हर बात पर शर्त लगाना उसकी आदत में शुमार हो गया था। इसलिए चंदन को लोग शर्तिया चंदन कह कर बुलाते थे। आज फिर उस ने शर्त लगाई थी आनंद से कि वह बड़ी हवेली के बगीचे से दस आम तोड़ के लायेगा।
शर्त पुरी करने के लिये वो किसी भी अंजाम को सोचता नहीं था.
रात के समयमे हवेलीसे आम तोडने के लिये चंदन निकला,हवेली की लंबी दिवार को लांघके बगीचेके अंदर चला गया.पर दिवार लांघते समय उसका पैर फिसल गया,उसके मूह से हाय!!मर गया ऐसी आवाज आयी.हवेली के द्वार पे खडे पेहरेदारो ने आवाज सुनी,उनको पता चला की आवाज बगीचे से आयी है तो वो तुरंत बगीचे मे चले गये.चंदन आम तोडने के लिये जानेही वाला था इतने में उसका मोबाईल बजा.मोबाईल की आवाज से पेहरेदारो ने चंदन को पकड लिया,और बिना देखे ही उसे पिटना चालू किया.वो चिल्लाता रहा मत मारो मुझे.. जाने दो पर किसीं ने एक नहीं सुनी.चंदन को पकड कर वो लोग उसे हवेली के मालिक के पास ले गये.मालिक ने चंदन को पेहचाना और उससे कहा अरे चंदन तुम क्या कर रहे थे बगीचे मे.चंदन को कुछ समज नहीं आ रहा था अब क्या बोलू.
चंदन ने कहा कुछ नहीं मालिक टेहलने के लिये निकला था.पेहरेदार ने सब माजरा क्या है मालिक को बताया. मालिक ने चंदन को छोड दिया.घर जाकर चंदन दर्द से कहार रहा था.
दुसरे दिन गाव वालो को ये खबर पता चली तो सब लोग हंस रहे थे की चंदन को दस आम बहुत मेहंगे पड गये.चंदन का तो पुरा मूह उतरा हुवा था.
तबसे किसीने चंदन को शर्तीया चंदन नहीं बुलाया.
इंसान भी हमेशा अपना नाम,प्रतिष्ठा,या समाज मे अपनी वाह वाह होने के लिये ऐसे ही कुछ हरकते करता है बिना किसीं अंजाम की परवाह करते हुये.
इसिलिये हमे जीवन मे जो कुछ करना है सोच समजकर करना है वरना हमे भी शर्तीया चंदन होने मे देर नहीं लगेगी..
© ram gagare