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बहू या.....
घर के आंगन की शोभा, माँ का स्वरूप, पिता का गुरुर, भाई की लाडली, ऐसी ही तो होती है, हर बेटी l जन्म से ही पलकों तले महफूज़ रखती है हर मां l हर भाई उसके लिए हर खुशी बटोरने को तत्पर रहता है l पिता, भले ही कुछ ना कहे, लेकिन उनकी नज़रे उसे हँसते, खिलखिलाते, देखने को सदैव तत्पर रहती है l उसकी एक मुस्कुराहट जैसे उनकी दिन भर की थकान दूर कर देती है l एक दिन वो अपनी एक नई दुनिया में जायेगी और सबसे दूर हो जायेगी, याद आते ही सबका मन कचोटने लगता है परंतु नियति का विधान ही यही है कि उसे किसी और परिवार को बसाना है l इसके लिए उस का हर प्रकार के गुण एवम संस्कारों से पालन पोषण किया जाता है l
यहाँ तक तो सब बहुत अच्छा है, आप सब भी सहमत है परंतु वही लड़की दुसरे परिवार में पराई ही क्यों रहती है l अपनी बेटी के अवगुण भी मान्य है किंतु बहू के गुणों की प्रशंसा तो दूर , उसे सदस्य भी मानना मुश्किल होता है l
बड़ी विडंबना है कि एक लड़की माँग में चुटकी भर सिंदूर लगाते ही अस्तित्वहीन हो जाती है l एक बेटी के द्वारा दूसरी बेटी को दी गयी प्रताडना को सभी अनदेखा करते है l आप ये अक्सर अपने आस पास देखते होंगे कि लड़की का आना बहू नापसंद करती है, लेकिन क्यों ????? क्योंकि मानसिक तौर पर बहू विवाह उपरांत ससुराल को अपना घर, अपनी दुनिया मानती है l हर जिम्मेदारी को सहर्ष स्वीकारति है l परिवार के हर सदस्य के प्रति बिना कहे अपने फर्ज़ पूरा करने की कोशिश करती है, जिसके परिणाम स्वरूप जाने अनजाने घर और घर की दीवारों में भी उसकी उपस्तिथि अप्रत्यक्ष रूप से बसती जाती है l
अब यहाँ से ही एक व्यर्थ का द्वंद जन्म लेता है, जहाँ उस घर की बेटी उसे स्वीकार नहीं पाती l और उस से भी ज्यादा गलती होती है परिवार जन की, जो मोहवश उसके मतिभ्र्म के लिए उसे समझाने के बजाय, जाने अनजाने ही सही, परंतु घर की बहू की अवहेलना करते है जो उसके लिए किसी मानसिक प्रताड़ना से कम नहीं होती l जिस घर परिवार को वो अपना मानती है, जिस से उसका अस्तित्व जुड़ा है, वही वो खुद को एक अनवांछित सदस्य के रूप में पाकर पूरी तरह से टूट जाती है l विडंबना ये है कि जिस कांधे पर वो सर रख रोना चाहती है या जिसके शब्दों में वो खुद को पाना चाहती है, वो भी उस से दूर, बहुत दूर होता है l
ये लगभग हर घर की कहानी है l क्यूँ भूल जाते है कि अगर आपकी बेटी आपकी लाडली है तो बहू भी किसी घर की बेटी है l और जब किसी के जिगर का टुकडा आपके पास है तो आपका फर्ज़ उसे संभालना है ना कि प्रताड़ित कर पल पल टूटने और बिखरने को मजबूर करना l
सोचियेगा जरूर ..... त्रुटि के क्षमा 🙏🏻🙏🏻 .


© * नैna *