...

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उम्मीद
हांजी तो बताइये ,क्या आपका भी दिल टूटा हैं, I think. सभी का टूटा होगा कभी ना कभी, कही ना कहीं किसी ना किसी के हाथों, और अच्छी बात भी हैं दिल का टूटना, एक दिल ही हैं जो टूटने के बाद मजबूत होता हैं,
लेकिन सोचने वाली बात ये हैं
कि दिल टूटता क्यों हैं , हाँ ये बात भी हैं हम अपना दिल अपने हाथों तो तोड़ेंगे नही,
दरअसल दिल का कोई roll नही होता, सारा खेल उम्मीदों का होता हैं,जी जनाब कसूर आँखे करती हैं , तड़पना दिल को पड़ता हैं ,आपने भी सुना होगा,ये उम्मीद बहुत नाजुक होती हैं ,अगर दिल का हो जाय तो पूरी हो जाती हैं और न हो तो अधूरी रह जाती हैं ,सच बात तो ये हैं ,हम जब किसी से उम्मीद लगा लेते हैं...