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गृहिणी
गृहिणी वह शब्द हैं जिसका रिणी पुरा घर होता हैं । जिसके आने से एक ईट का मकान "घर" में बदल जाता हैं।
पर अफ़सोस कि इस बात पर बहुत कम लोग विचार कर पाते हैं या फिर ये कहे कि इसे कोई महत्व ही नहीं देता। या फिर उनके नजरों में एक ऐसी स्त्री जो केवल घर में रह कर बिना किसी शिकायत के, बिना किसी सैलरी के पुरा जीवन अपनों के खुशी के लिए, अपनों को सवारने में ,समेटने में लगी रहती हैं, वो स्त्री कोई काम नहीं करती।
देखा है मैनें अपनी माँ को , बिमार में भी अपने बच्चों कि जिम्मेदारियां लेते हुऐ। मेरी भाभी को बारिश में भींग कर मेरे पापा के लिए दवाईयां लाते हुऐ। और न जाने कितने ही ऐसे काम बडे़ सिद्त से करते हुऐ जो कल्पना से परे है।
पर क्यों और किस लिए ये सुनने के लिए कि "कुछ नहीं करती "क्या पैसे कमाना हि समाज कि सबसे बड़ी जरूरत हैं, या ये कहे कि पैसे से देखभाल और जिम्मेदारियां भी कमाई जा सकती हैं, या फिर माँ जैसा प्यार खरिद सकते हैं??