रूह की कैद का घोषणांक साक्षात्।।
यह गाथा प्रथम में सबसे पहले तो रूह की कैद ही पहुंच और समझ से परे है क्योंकि यहां अब हम आप इस कैद का घोषणांक, साक्षात्, विषय विगृह उद्देश्य प्रयास तथा लक्ष्य की खोज में ले चल रहे हैं जहां सबसे पहले हम कुछ विषयों के बारे में जान इसके माध्यम से इसके यात्रा का पूरा अनुभव करेंगे जैसे आइए जानते हैं -जैसे इसमें सबसे पहला मुहावरा है रूह की कैद अर्थात जो अर्वणन है -प्रेम का साक्षात हो जाना
मोक्ष स्वरूप छवि व स्मृति ही साछत होकर वह...
मोक्ष स्वरूप छवि व स्मृति ही साछत होकर वह...