घोषणाकं पर आधारित व्याख्या का प्रचार किया जा रहा।।
घोषणांक -एक शव -व्यर्थकी विकल्प एकमात्र शव ही शिव सिद्ध घोषित करार दिया गया होगा।।जो नहीं है वहीं शव में शिव जो कि त्री स्तुति स्तोत्रम् की धातु स्वरूप है।।वह वर्थकी इस मंंच के घोषणांक सफर तय कर चुकी हैं एक स्टेटस या बहुत फिर बहुत सारे स्टेटस की खोज की जिसकी खोज इस विषय के मंच पर वह एकमात्र शव ही शिव सिद्ध में एकमात्र आखिरी मजर स्तभ कुंज ए कुंभ ज्योति की जागृति से वह सौर्याभौमिक सत्य सिद्ध का एक स्टेटस घोषित करार गई थी जो कि भेद की बात तक आ जाती है।।इसलिए यह व्यर्थनी से सौर्याभौमिक स्तंभ स्तुति स्तोत्र का सृजन ए संबोधन में बुनियादी ए ईमारत सभी लोगों भूत प्रेत सब कुछ नहीं आ सकते हैं।।हैं, इसलिए सभी लोगों के पास सबकुछ नहीं आ सकता जैसे भूत प्रेत सबकुछ नहीं आ आ सकता है इसलिए यदि सब को सबकुछ प्राप्त हो जाए तो फिर वह शव से शव का घोषणाकं संतुलन में होकर इस गाथा में उपस्थित उस शव से शव की यात्रा की संतुलन में होकर रोगिन श्रेणी में वह उस शव से शव की यात्रा ही नष्ट हो जाएगी अर्थात वह सौर्याभौमिक स्तंभ स्तुति स्तोत्र पाठ में घोषित होकर स्वयं के अनुसार ही शव होकर ही शवमगन सिद्धि के सिद्धांत में प्रवेश होकर वह शव नायिका शव में शिव को समर्पित हो...