...

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एक दास्तान जारी।।
मालकि ने मेरा हाथ पकड़ते हुए कहा कि चली जाना घर इतनी भी क्या जल्दी है और रूपए भी ले जाना साथ में । लेकिन उससे पहले हमारा मनोरंजन तो कर दो कहते हुए ,उन शाराबियो के बीच धक्का देकर फेक दिया ! मैंने उठने की कोशिश की परन्तु उन ने मुझे पकड़ते हुए मेरे ऊपर किसी शिकारी कुत्तों की तरह टूट पड़े।।
मैं चिल्लाते हुए अपनी इज्जत बचाने के लिए
उनको धक्के देने लगी अपने से दूर हटाने लगी ,
उनको उनकी बहन बेटियों की कसम देने लगी,
रोने गिड़गिड़ाने लगी।
लेकिन उन्होंने मेरी कोई बात नही सुनी , और मेरे साथ जबरदस्ती करते हुए , सबने एक एक करके हुए मुझे अपनी हवस का शिकार बनाया। और मुझ पर रूपए फेंककर अभद्र भाषा बोलने लगे। रंडी,कुत्तियां,साली, मादरचोद,बहन चोद तेरी गांड़ चोदे। मैं उन
दरिंदों के वही रूपए फेंककर , जैसे तैसे अपने इज्जत खोकर अपना अस्तित्व बचाकर वहां से भाग आयी।।
#जारीसंगृराम
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