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💜" सानिध्य "💜
नीलम की नई नई शादी हुई थी। पति सौम्य एक उच्च पद पर कार्यरत थे। घर में किसी वस्तु की कोई कमी न थीं। मगर सास ससुर देवर देवरानी जेठ जेठानी तथा उनके बच्चों से घर का माहौल हर समय शोरगुल और हंसी ठहाकों से गूंजा रहता। ये कहानी उस समय की है जब बेटे नौकरी के लिए कहीं बाहर दूसरे शहर नहीं जाया करते बल्कि अपने माता पिता के साथ रहने को ही वरियता दिया करते थे। तब मनोरंजन के नाम पर केवल सिनेमा ही था।
नीलम सोम्य से प्रेम करती थी,दोनों की नई नई शादी हुई थी इसलिए वो ज्यादा से ज्यादा एक दूसरे का सानिध्य चाहते थे,लेकिन घर पर ये संभव ही नहीं हो पाता था।
दिन भर के बाद जब रात को दोनों कमरे में जातें तभी थोड़ी बहुत बातें उनमें होती वरना सुबह तो एक दूसरे के साथ बैठना भी मुश्किल था।
दिन इसी तरह बीतते रहे कि एक दिन सौम्य जब रात को अपने कमरे में आया तो उसके होठों पर मुस्कान थी। नीलम भी सौम्य को मुस्कुराता देख कर चहक उठीं और बोली"क्या बात है?
आज बहुत मुस्कुरा रहे है? "
तब सौम्य ने कहा "सुनो नीलू अगले हफ्ते मेरे एक मित्र का विवाह है ऐसा बोलकर हम दोनों तीन चार दिन के लिए शिमला चलते है,वहाँ हम दोनों घूम भी लेंगे और एक दूसरे का साथ भी पा लेगें,सुनकर नीलम भी मुस्कुरा दी। दूसरे दिन सौम्य ने सबसे यही कहाँ कि उसके मित्र की चिट्ठी आई है कि अगले हफ्ते उसका विवाह है तो तुम्हें और भाभी को निश्चय ही आना होगा,इसलिए मै और नीलम शुक्रवार को ही निकल जायेगें।
शुक्रवार को शाम की गाड़ी थी तो दोनों दोपहर को ही निकल गए। रास्ते में सौम्य ने कुछ खाने पीने का सामान ले लिया बाकी नीलम ट्रेन में खाने के लिए आलू की सब्जी और पराठे लेकर आई थी।
दूसरे दिन सुबह दोनों शिमला पहुँच गए,शिमला की खूबसूरत वादियों में आकर नीलम और सौम्य मंत्रमुग्ध हो गयें।
होटल पहुँच कर दोनों ने खाना खाया और एक दूसरे से खूब मोहब्बत भरी बातें की फिर नीलम की कब आंख लग गई उसे पता ही न चला।
शाम को उठीं तो सौम्य नहीं थे शायद बाहर गए थे,फिर नीलम ने मुंह हाथ धोएं और होटल की खिड़की से बाहर का नजारा देखने लगीं,उनका कमरा तीसरे माले पर था।
तभी पीछे से सौम्य आ गए उनके हाथों में गज़रा था वो नीलम के बालों में गज़रा लगाते हुए बोले बिलकुल इन फूलों की भांति तुम मेरे जीवन में सदा अपनी मुस्कान और आपसी समझ की महक बिखेरना और मै तुम्हारे रूप की चांदनी और प्रेम के सरोवर में डुबकी लगाऊँगा।
सुनकर नीलम रक्ताभ हो उठीं और सौम्य ने उसे अपने आलिंगन में कस लिया। आज विवाह के ६ महीने बाद ही सही दोनों को एक दूसरे का संपूर्ण सानिध्य मिल गया था। (समाप्त) लेखन समय दोपहर -3:47 शुक्रवार



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