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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस
21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जाता है।
योग के द्वारा मनुष्य के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रोगों का निवारण होता है। योग मनुष्य को वैज्ञानिक तरीके से समग्र रूप से स्वस्थ बनाता है।
       योग सिर्फ शारीरिक रूप से ही स्वस्थ नहीं बनाता बल्कि मनुष्य के खाने-पीने, उठने-जागने,विचारने-बोलने तक जीवन के सभी आयामों में परिवर्तन करके मनुष्य का चिन्तन बदलता है जिससे जीवन में सकारात्मकता का समावेश ‌होता है।
        जहां तक योग के अध्यात्म पक्ष की बात है तो गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने खुद को प्रणव(ओम) बताया है (प्रणव: सर्ववेदेषु शब्द: खे पौरुषं नृषु:)। ओम की ध्वनि वातावरण को भी सकारात्मक ऊर्जा ‌से भरती‌ है।
ओम उच्चारण योग का अनिवार्य तत्व है। जैसा कि विज्ञान कहता है ऊर्जा को ना ही नष्ट किया जा सकता है और ना ही बनाया  जा सकता है, ऊर्जा सिर्फ रूप बदल सकती हैं। जब हम ओम का उच्चारण करते हैं‌ तो हमारी ऊर्जा ‌ ध्वनि ऊर्जा में बदल जाती है जो वातावरण में सकारात्मक माहौल पैदा करती है।
        वैज्ञानिक रूप से योग के‌द्वारा सांसों पर‌ नियंत्रण के द्वारा हम वास्तव में रुधिर में ऑक्सीजन की मात्रा का उचित प्रबंधन करने में सक्षम हो जाते हैं जिससे आयु लंबी होती है।
    संक्षेप में हम यह कह सकते हैं कि योग जीवन में आयु बढ़ाता है‌ और आयु में जीवन को डालता है।

© Mohan sardarshahari