प्यारी बिल्लो Drama Queen Part 1
प्यारी बिल्लो सारे जहान का दर्द उसी के चेहरे पे दिखता है..बातें ऐसी ऊँची कि सातवें आसमान को छू रहीं होती है. सामने वाला बस बेवकूफ़ बना उन बातों पर यकीन कर रहा होता है. ख़ुद को सबसे क़ाबिल घोषित कर चुकी हैं. कुछ भी खो जाये मगर ख़ुद को कभी मत खोने देना.. उनकी मोटिवेशनल लाइनस् प्रतीत होती हैं.
बड़े नखरे उठाए जाते हैं प्यारी बिल्लो के.उनकी आँखों में गड्ढे पड़ जाएँ तो इंटरनेशनल ब्रेकिंग न्यूज हो जाती है. सर में दर्द हो तो पूरे खानदान की शामत आ जाती है कि प्यारी बिल्लो को सब फोन करके उनकी तबीयत पूछें.
जी, आप सही समझे मैं कौनसी बिल्लो की बात कर रहीं हूँ.
हर घर में या खानदान में या रिश्तेदारी में कहीं ना कहीं प्यारी बिल्लो का किरदार मौजूद होता है.
इस तरह नखरे उठवाये जाते हैं कि बस अल्लाह की पनाह. हर वक़्त ऐसा मुँह बना रहता है जैसे पूरी जहां की मुसीबत इन्हीं पर आन पडी हो.
उनके महफ़िल में आते ही शहनाज गिल का फेमस डायलॉग हम पर बिलकुल फिट बैठता है
"त्वाडा कुत्ता टॉमी साडा कुत्ता कुत्ता" 😂🤣
एक दिन प्यारी बिल्लो मेरे पास मौजूद थी और बता रही थी कि वो अपने पति का इन्तेज़ार कर रहीं है अभी तक नहीं आये खाना पकाने को देर हो रही है." मैंने बिल्कुल जानना चाहा कि वह ऐसा क्यूँ कह रहीं थीं मैंने उससे पूछा," क्या तुम्हारे पति को सब्जी लाना है?"
उसने कहा," नहीं पाँच किलो चावल का पैकेट नीचे से उठाकर ऊपर रखना है मैं तो नहीं उठा सकती हूँ. "
मैं कुछ प्रतिक्रिया नहीं दे पायी क्यूँकी उस समय मैं प्यारी बिल्लो के हैंडबैग (पर्स) के बारे में सोच रहीं थीं जिसमें बीस किलो मेकअप का सामान होता है और प्यारी बिल्लो बस वहीं बैग खुशी खुशी उठा रही होती हैं
फिर मैं मुस्कराने लगी और बस ये लाइन ही याद आयी कि...
" फ़र्श ए मखमल से प्यारी बिल्लो के पाँव जले जाते हैं
यहाँ बिल्लो की बातें सुन सुन हम बेहोश हुवे जाते हैं "😅
कभी कभी सफ़र के दौरान कुछ ऐसे लोगों से दो चार होना पड़ता है जिनको झेलना वाकई mission impossible सा लगता है...
और सफ़र भी ऐसा जिसकी मंज़िल प्यारी बिल्लो की नगरी हो तो रोमांच यात्रा से ही प्रारंभ हो जाता है..
रेलवे स्टेशन पर जहां हम बैठे थे वहीं थोड़ी दूर पर बैठी एक औरत बड़ी अजीब सी हरकतें कर रही थी... कभी अपनी सेल्फियां ले रही थी तो कभी बहुत बेबाकी से पूरे रेलवे स्टेशन के वीडियो बनाने लगती थी.
उसको इतना भी ख्याल नहीं था कि कोई पैसेंजर उसका वीडियो बनाना पसंद करेगा या इस बात का बुरा मान जायेगा.
कई बार उसने मेरी तरफ आकर भी वीडियो बनाने की कोशिश की...
ट्रेन आने तक ये ड्रामा चलता रहा... अब इसे प्यारी बिल्लो की नकारात्मक शक्तियों के साम्राज्य का असर कहेंगे... या फिर कुछ और कि वो अजीब व्यवहार करने वाली औरत मेरी ही सीट पर आकर बैठ गयी...
मतलब साफ़ था कि अब ये सेल्फी क्वीन पूरे रास्ते वीडियो और सेल्फियां बनाते हुए जाने वाली हैं... औऱ उसने मेरी उम्मीद के मुताबिक सीट पर बैठते ही सेल्फियां लेना शुरू कर दी थीं .
काफी देर तक ये ड्रामा चलता रहा सेल्फी क्वीन मेरे और एक लड़के के बीच में बैठी थीं.. आधे घंटे तक हम दोनों ही सेल्फी क्वीन के सेल्फी हमलों से ख़ुद को बचाते रहे... पर शायद उस लड़के ने हार मान ली थी... उसने ट्रेन की खिड़की की तरफ मुँह करके अपनी कैप अपने मुँह पर रखी और सो गया...
सेल्फी क्वीन अपने काम में मस्त रहीं... आख़िरकार मुझे एक रास्ता सूझा...
मैंने उससे कहा, "सुनो इस ट्रेन में सेल्फी लेना मना है.. अगर तुम्हें सेल्फी या वीडियो बनाते हुए इस ट्रेन के स्टाफ ने देख लिया तो वो तुम्हारा फोन अपने पास रख लेंगे.. औऱ जब तुम ट्रेन से उतरोगी तब तुम्हारा फोन तुम्हें दिया जायेगा.
या फिर शायद फोन अपने ही पास रख लें.."आख़िरी लाइन मैंने बहुत ज़ोर देकर बोली ... क्यूँकी यही मुझे मेरा ब्रह्मास्त्र नजर आ रहा था...
सेल्फियों का हमला कुछ देर के लिए थम गया था.. बड़ी बड़ी आँखों से उसने मुझे हैरानी से घूरा.... फिर फौरन एक कॉल मिलाया, "हैलो, ट्रेन चलने वाली है मैं फोन अपने पर्स में रख रहीं हूँ... जो गलतियांँ हुई वो माफ़ कर देना."
उसने फोन काट दिया था... आखिरकार सेल्फी युद्ध में मैं विजयी हो गयी थी..
आज इस जीत का नशा कुछ अलग था.. ऐसा लग रहा था मानो ब्रहमांड की दुश्मन हुई किसी बड़ी ताकत को मैंने आज परास्त कर दिया है.
उसकी फोन कॉल से मुझे अंदाजा हुआ कि वो ट्रेन में पहली बार बैठी है...
" क्या तुम पहली बार ट्रेन में बैठी हो." मैंने बगैर झिझक के उससे सवाल कर डाला
"जी, मैं अपनी बहन के यहाँ घूमने जा रहीं हूँ..." उसने बताया
ये भी बहुत ही अजीब इत्तेफ़ाक हो गया कि प्यारी बिल्लो की नगरी उसकी भी मंज़िल थी...
मतलब अब इस सफ़र का सेल्फी क्वीन के हाथों बाजा बजना तय था
" इंजीनियर हो??" दनदनाता उसका एक सवाल मेरे कानों से आ टकराया मैंने बड़ी मासूमियत से ना में गर्दन हिलायी.
"तो क्या हो" दूसरा सवाल पहले सवाल से ज़्यादा तेज़ी से आया
"लड़की हूँ" मैंने बेचारगी से कहा
"शादी हो गयी तुम्हारी" तीसरा सवाल दूसरे जवाब पर ध्यान दिये बिना ही दाग दिया गया था....
"हाँ,," मैंने कहा
"तो पति कहाँ है तुम्हारे?? अकेली जा रही हो? क्या वो तुम्हें स्टेशन पर लेने आएँगे??? इतनी स्पीड में कभी गन नहीं चल पायी होगी जिस तरह से मुझ पर सवालों की बौछार हो रही थी...
मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या सेल्फी क्वीन से उसका फोन पर्स में रखवा कर मैंने सही किया???
हालाँकि मैंने उसके सारे सवालों के जवाब सही नहीं दिए थे .. वजह यही थी कि मेरे लिये वो भी अजनबी थी और इस तरह उसका बेबाकी से सवाल पूछना मुझे अजीब लग रहा था.
अब मैंने...
बड़े नखरे उठाए जाते हैं प्यारी बिल्लो के.उनकी आँखों में गड्ढे पड़ जाएँ तो इंटरनेशनल ब्रेकिंग न्यूज हो जाती है. सर में दर्द हो तो पूरे खानदान की शामत आ जाती है कि प्यारी बिल्लो को सब फोन करके उनकी तबीयत पूछें.
जी, आप सही समझे मैं कौनसी बिल्लो की बात कर रहीं हूँ.
हर घर में या खानदान में या रिश्तेदारी में कहीं ना कहीं प्यारी बिल्लो का किरदार मौजूद होता है.
इस तरह नखरे उठवाये जाते हैं कि बस अल्लाह की पनाह. हर वक़्त ऐसा मुँह बना रहता है जैसे पूरी जहां की मुसीबत इन्हीं पर आन पडी हो.
उनके महफ़िल में आते ही शहनाज गिल का फेमस डायलॉग हम पर बिलकुल फिट बैठता है
"त्वाडा कुत्ता टॉमी साडा कुत्ता कुत्ता" 😂🤣
एक दिन प्यारी बिल्लो मेरे पास मौजूद थी और बता रही थी कि वो अपने पति का इन्तेज़ार कर रहीं है अभी तक नहीं आये खाना पकाने को देर हो रही है." मैंने बिल्कुल जानना चाहा कि वह ऐसा क्यूँ कह रहीं थीं मैंने उससे पूछा," क्या तुम्हारे पति को सब्जी लाना है?"
उसने कहा," नहीं पाँच किलो चावल का पैकेट नीचे से उठाकर ऊपर रखना है मैं तो नहीं उठा सकती हूँ. "
मैं कुछ प्रतिक्रिया नहीं दे पायी क्यूँकी उस समय मैं प्यारी बिल्लो के हैंडबैग (पर्स) के बारे में सोच रहीं थीं जिसमें बीस किलो मेकअप का सामान होता है और प्यारी बिल्लो बस वहीं बैग खुशी खुशी उठा रही होती हैं
फिर मैं मुस्कराने लगी और बस ये लाइन ही याद आयी कि...
" फ़र्श ए मखमल से प्यारी बिल्लो के पाँव जले जाते हैं
यहाँ बिल्लो की बातें सुन सुन हम बेहोश हुवे जाते हैं "😅
कभी कभी सफ़र के दौरान कुछ ऐसे लोगों से दो चार होना पड़ता है जिनको झेलना वाकई mission impossible सा लगता है...
और सफ़र भी ऐसा जिसकी मंज़िल प्यारी बिल्लो की नगरी हो तो रोमांच यात्रा से ही प्रारंभ हो जाता है..
रेलवे स्टेशन पर जहां हम बैठे थे वहीं थोड़ी दूर पर बैठी एक औरत बड़ी अजीब सी हरकतें कर रही थी... कभी अपनी सेल्फियां ले रही थी तो कभी बहुत बेबाकी से पूरे रेलवे स्टेशन के वीडियो बनाने लगती थी.
उसको इतना भी ख्याल नहीं था कि कोई पैसेंजर उसका वीडियो बनाना पसंद करेगा या इस बात का बुरा मान जायेगा.
कई बार उसने मेरी तरफ आकर भी वीडियो बनाने की कोशिश की...
ट्रेन आने तक ये ड्रामा चलता रहा... अब इसे प्यारी बिल्लो की नकारात्मक शक्तियों के साम्राज्य का असर कहेंगे... या फिर कुछ और कि वो अजीब व्यवहार करने वाली औरत मेरी ही सीट पर आकर बैठ गयी...
मतलब साफ़ था कि अब ये सेल्फी क्वीन पूरे रास्ते वीडियो और सेल्फियां बनाते हुए जाने वाली हैं... औऱ उसने मेरी उम्मीद के मुताबिक सीट पर बैठते ही सेल्फियां लेना शुरू कर दी थीं .
काफी देर तक ये ड्रामा चलता रहा सेल्फी क्वीन मेरे और एक लड़के के बीच में बैठी थीं.. आधे घंटे तक हम दोनों ही सेल्फी क्वीन के सेल्फी हमलों से ख़ुद को बचाते रहे... पर शायद उस लड़के ने हार मान ली थी... उसने ट्रेन की खिड़की की तरफ मुँह करके अपनी कैप अपने मुँह पर रखी और सो गया...
सेल्फी क्वीन अपने काम में मस्त रहीं... आख़िरकार मुझे एक रास्ता सूझा...
मैंने उससे कहा, "सुनो इस ट्रेन में सेल्फी लेना मना है.. अगर तुम्हें सेल्फी या वीडियो बनाते हुए इस ट्रेन के स्टाफ ने देख लिया तो वो तुम्हारा फोन अपने पास रख लेंगे.. औऱ जब तुम ट्रेन से उतरोगी तब तुम्हारा फोन तुम्हें दिया जायेगा.
या फिर शायद फोन अपने ही पास रख लें.."आख़िरी लाइन मैंने बहुत ज़ोर देकर बोली ... क्यूँकी यही मुझे मेरा ब्रह्मास्त्र नजर आ रहा था...
सेल्फियों का हमला कुछ देर के लिए थम गया था.. बड़ी बड़ी आँखों से उसने मुझे हैरानी से घूरा.... फिर फौरन एक कॉल मिलाया, "हैलो, ट्रेन चलने वाली है मैं फोन अपने पर्स में रख रहीं हूँ... जो गलतियांँ हुई वो माफ़ कर देना."
उसने फोन काट दिया था... आखिरकार सेल्फी युद्ध में मैं विजयी हो गयी थी..
आज इस जीत का नशा कुछ अलग था.. ऐसा लग रहा था मानो ब्रहमांड की दुश्मन हुई किसी बड़ी ताकत को मैंने आज परास्त कर दिया है.
उसकी फोन कॉल से मुझे अंदाजा हुआ कि वो ट्रेन में पहली बार बैठी है...
" क्या तुम पहली बार ट्रेन में बैठी हो." मैंने बगैर झिझक के उससे सवाल कर डाला
"जी, मैं अपनी बहन के यहाँ घूमने जा रहीं हूँ..." उसने बताया
ये भी बहुत ही अजीब इत्तेफ़ाक हो गया कि प्यारी बिल्लो की नगरी उसकी भी मंज़िल थी...
मतलब अब इस सफ़र का सेल्फी क्वीन के हाथों बाजा बजना तय था
" इंजीनियर हो??" दनदनाता उसका एक सवाल मेरे कानों से आ टकराया मैंने बड़ी मासूमियत से ना में गर्दन हिलायी.
"तो क्या हो" दूसरा सवाल पहले सवाल से ज़्यादा तेज़ी से आया
"लड़की हूँ" मैंने बेचारगी से कहा
"शादी हो गयी तुम्हारी" तीसरा सवाल दूसरे जवाब पर ध्यान दिये बिना ही दाग दिया गया था....
"हाँ,," मैंने कहा
"तो पति कहाँ है तुम्हारे?? अकेली जा रही हो? क्या वो तुम्हें स्टेशन पर लेने आएँगे??? इतनी स्पीड में कभी गन नहीं चल पायी होगी जिस तरह से मुझ पर सवालों की बौछार हो रही थी...
मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या सेल्फी क्वीन से उसका फोन पर्स में रखवा कर मैंने सही किया???
हालाँकि मैंने उसके सारे सवालों के जवाब सही नहीं दिए थे .. वजह यही थी कि मेरे लिये वो भी अजनबी थी और इस तरह उसका बेबाकी से सवाल पूछना मुझे अजीब लग रहा था.
अब मैंने...