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#दीप
इसकी हमें खुशी है वो मशहूर हो गए
आगे निकल गए वो बहुत दूर हो गए

कल तक बहुत सी बात कही भी सुनी भी थीं
खामोश आज रहने को मजबूर हो गए

सूरज जो चढ़ रहा हो सलामी उसे मिले
हम किरकिरी अब आँख की वो नूर हो गए

शिकवे ज़िरह शिकायतें करना फ़िजूल था
तो फैसले ये भी हमें मंजूर हो गए

मिलने बिछड़ने की तो रवायत रही है दीप
क्यों कह रही हो ये नए दस्तूर हो गए
#ग़ज़ल