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मुक्त हो जग हर बन्धन,
वन- वन भटक रहा मन;
नयन सजा सुन्दर स्वप्न,
मन में लेकर नव लगन।

पग - पग करता गमन,
नित्य करता नव- यतन;
तृण तापता समय तपन,
धरा सूर्य को कर नमन।

मंजूर नहीं प्रकृति पतन,
ज्ञान -ध्यान-योग लगन;
अधर्म भस्म ज्ञान अगन,
गूंजे स्नेह गीत - भजन।