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तर गए कितने....🌹🌹✍️✍️( गजल)
ख्वाब टूट कर मेरे बिखर गये कितने
मेरी नजरों से जाने उतर गये कितने

जो महफिल में बैठे हैं पक्के यार हैं
हमें नहीं मालूम अपने घर गये कितने

जिन्दगी का नाम ही संघर्ष है 'सत्या'
मुसीबत देख के यूं ही डर गये कितने

जो अपनी मानते हैं हुकूमत जहां में
पूछो आजादी पाने में सर गये कितने

उसके जाने से मेरी जिंदगी के साहब
अरमान अनगिनत मर गए कितने

हर मोड़ पे झेले हमने तूफां जहां के
गम मेरे दिल पर गुजर गए कितने

पाप करके गंगा स्नान कर रहे हैं जो
हमें भी बताओ यार तर गए कितने


© Shaayar Satya