...

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हर राह पर
हर राह पर आएगा वो साथ
जो करोगे उस पर दृढ़ विश्वास।
तुम्हारे कदमों की रफ़्तार बनकर
तुम्हारे हाथों की ढाल बनकर।
तुम्हारी दृष्टि बनकर कभी तुम्हारे
कान बनकर। कभी बन जाएगा
तुम्हारा शुभचिंतक और कभी
अँधेरों में राह दिखाएगा। कभी
जब तुम फ़ैसला नहीं कर पाओगे।
वो आएगा चुपके से दिल की
आवाज़ बनकर। वो अभी भी है
तुम्हारे साथ, बस तुमने ही नहीं
समझा उसे ख़ास। वो तुम्हें देख
भी रहा है सुन भी रहा है, बढ़ाओ
ज़रा हाथ और सौंप दो उसे अपने
जीवन की बागडोर। फ़िर वो जाने
और उसका काम। बस तुम बिंदास
ख़ुश रहो सुबह शाम, वो ख़ुद करेगा
तुम्हारा मार्गदर्शन बस कर्म से पीछे
नहीं हटना तुम। संदेह तो हरगिज़ ना
करना तुम। किसी का कर सको भला
तो ज़रुर करना तुम। किसी और पर
करो ना करो, ख़ुद पर संपूर्ण विश्वास
करना तुम। आख़िर तुम्हारा विश्वास
ही तो है जो बनाएगा तुम्हें लाज़वाब और ख़ास। तुम्हें भी उसपर करना होगा उतना ही विश्वास।