...

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मेरा कोई बसर नहीं है
कैसे उड़ जाऊं के अब मेरे पर नहीं हैं,
ज़िस्म ज़िंदा है मालिक सर नहीं है |
जो तू गया मेरी साँसे भी ख़फ़ा है,
मुझसा कोई अभागा कोई बेघर नहीं है |
तेरा जाना गलत था एक बात तो सही है,
ज़िंदगी खो दी अब कोई डर नहीं है |
पल पल तकती है मौत की राह
मरने को बेताब मुझसा कोई बेसबर नहीं है |
हर इंसां वाकिफ़ है मेरी खौफ़नाक कहानी से,
हर दिल गवाह है यहां कोई बेख़बर नहीं है |
तन्हाई ही अब आशियाना मेरा वजूद है,
बस इसके आगे मेरा कोई बसर नहीं है |
© ShayarShubh Writes