...

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2022
तुम्हारी तो शुरूआत ही नही अच्छी थी
पर समय के साथ तुम्हारी हर बात सच्ची थी
इस बार बहुत कुछ छिना हैं मुझसे
दोस्त,प्यार,रिश्ता और दूर किया इन सबसे
मैंने तो खुद को ही ,खो दिया था इस बार
और तय किया था, कि मिलूंगा तुमसे अगली बार
पर वो कहते हैं न ,कि अंत भला तो सब भला
अभी ,कल ही मेरे घर में, लक्ष्मी आई
लगा,सालभर कि खुशियां,एक ही दिन में आई
अब जा रही हो, तो सोचता हूं ,रोक लूं तुम्हे
और ये बात भी,परेशां करती होगी तुम्हे
कोसता रहा हूं ,अब रोकना चांंहू तुम्हे
सोचता हूं खुद को बदलकर ,इक नए ' विवेक ' से मिलाऊ तुम्हे ।
आभार
अलविदा 2022
© Danish 'ziya'