...

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एक बिखरा परिंदा
#दिल की दास्तां
मन मौन व्रत कर अपराध करता है
किस भांति देखो आघात करता है
इस दुनिया के रंग मंच पर खुशी बिखेरते -बिखेरते
अपनी खुशी को वह दरकिनार करता है
इस बिखरे हुए अंदाज से दुनिया घूमने को
संघर्ष वो मौत से हर रोज करता है
मन मौन व्रत कर अपराध करता है
किस भांति देखो आघात करता है
इस मतलब की दुनिया से हर रोज लड़ते-लड़ते
अपनों की नजरों में वह हर रोज गिरा करता है
अपने टूटे ख्वाबो का मंथन करते करते
हर एक व्यंग्य पर वो गंभीरता का प्रहार करता है
मन मौन व्रत कर अपराध करता है
किस भांति देखो आघात करता है..... from diary of dreams 😊