...

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मंजिल
पिघलना है सूरज को भी एक दिन
उस चांद को भी जल जाना होगा
है मंजिल मेरी दूर बहुत ,अभी दूर बहुत जाना होगा
आंचल की ठंडी छांव नही
ना कोई दरवाजा होगा
जब थक जाऊंगी राहों में
फिर भी ना रूक जाना होगा
जब तक ना मंजिल आएगी ,
मुझे चलते ही जाना होगा
है मंजिल मेरी दूर बहुत,मुझे दूर बहुत जाना होगा।

© priya writes....✍️