...

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लोकतंत्र का संसार
देखो देखो बाबू देखो
ये लोकतंत्र का संसार है
लुटती जनता पिटती नीतियां
वादों का अम्बार है
ढूंढती आशा घोर निराशा
भ्रष्टाचार की तीखी धार है
बिकती शिक्षा मरता भविष्य
बेरोज़गारी का बढ़ता भार है
सर से सर टकरा रहे है
जनसंख्या अपनी अपार है
पिछलग्गो की कमी नहीं
वोटों का भंडार है
कौन है अपना कौन पराया
नीतियों में समाया सार है
अब भी कदम संभाल लो
हुई नहीं अपनी हार है
देखो देखो बाबू देखो
ये लोकतंत्र का संसार है


© Yogendra Singh