...

12 views

"घर"
घर केवल चार दिवारी को नहीं कहते
जब तक उसमें सुकून और अपनत्व का
भाव न हो,उस घर में देव भी नहीं बसते।

जहां सुखद क्षण ही नहीं दुःखो को भी
हर एक सदस्य सब साथ मिलकर ही सहते।

जहां स्त्री क्रोधित मन से नहीं अपितु अपनों
के लिए आनान्दित होकर पाक बनायें उस
सादगी में भी मांसाहार ही नहीं अपितु दाल
रोटी भी सब प्रसन्नता से खाते।

जिस घर में बुजुर्गों का सम्मान किया जाएं
और अनुजों को दुलार किया जाए, स्त्री उस
घर की धुरी न होकर रानी का दर्जा है जिसे
हासिल सही मायने में वही घर बरकतें है पाते।


© Deepa🌿💙