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मौन शब्द
#SilentConfessions

उत ढलत रहा दिन मध्यम ढलती सांझ,
इत ढल रहा जीवन बिना पहुंचे मुकाम;
नित हर पल घट रहा नितिन -कोहराम,
मन अनंत भाव शब्द मौन करें विश्राम।

अनकहे शब्द कभी पा न सके अंजाम,
जीवन हर पल चित करते रहे परेशान;
पंछी से गूंजत मन उपवन सुबह- शाम,
पवन- पावनी से बह रहे बिन पहचान।

हम हम में रहे तुम तुम में रहे बन नाम,
पथ के दो पथिक एक दूजे से अंजान;
मधुबन की मौन बांसुरी बिन घनश्याम,
घनघोर बदरी तमस छुपे गुलाबी शाम।

जब कहे शब्द सुनकर हुए अनकहे से,
तब अधर कहके क्यूं शब्द करें बेदाम;
विह्वल ह्रदय अतल मौन बना श्मसान,
जहां भाव मोल नहीं बोल न करें काम।

धूं - धूं कर जले जीवन सभी अरमान,
तरनी के दो तट कण कण कटे समान;
तरनी संग चले पर हुए ना एक समान,
अनंत अन उकरे अंकुर का अवसान।


© Nik🍁