...

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काश....
ऐ काश!कभी ऐसा होता..
उस पार गए 'उन'लोगों से,
कुछ मिलने का ज़रिया होता!
कोई खिड़की या दरवाज़ा सा,
कभी बंद और कभी खुला हुआ
इस अम्बर बीच लगा होता!
जब यादें बोझिल कर जाती,
रो-रो कर आँखें थक जाती..
बस,एक झलक से,उस पल में
हाय!कितना सुकूँ सा मिल जाता!
ऐ काश!कि कुछ ऐसा होता...
या,फ़िर ये संभव हो पाता...
हम कोई संदेसा भिजवाते,
ये पवन ये बादल ले जाते,
फ़िर रिमझिम मंद फुहारों संग,
हमको "जवाब"भी मिल जाता!
ऐ काश!कि कुछ ऐसा होता😢

© दीp
#डायरी के पन्नों से