...

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जब एक दिन थक जाऊंगा
#TrulyAlive

जब मैं थक जाऊंगा
दौड़ते दौड़ते रुक जाऊंगा
एक दिन निर्जीव लावारिश
लाश हो जाऊंगा
तब जानेंगे लोग मुझे
तब अहमियत होंगी या नहीं
ये तो पता नहीं
क्या अहंकार की गांठ
सुलझेगी
ये भी तो पता नहीं
पर हां इतना पता हैं
स्वार्थ के लोग
अपनी अना को बचाते हुए
रोयेंगे, रंज और अफ़सोस
से मुझे गलत ही सावित करेंगे
जब मैं चिर निंद्रा में सों रहा होऊंगा
ये सत्य ही हैं कि
मैं अकेला ही आया था
लोग मिलते गए करवा बनता गया
लोग लूटते रहें और मैं अपनेपन में लुटता गया
मैं ही तो था जो पहचान ना सका
मुखोटे लगे चेहरों को
और सब कुछ शून्य होता गया
और मैं भी, क्योंकि यही हैं
आज की ज़िन्दगी का परिणाम हैं
अपने भी मुझे बांट लेंगे
कुछ वर्षों के लिए
जब मैं हैं से था हो जाऊंगा

© DEEPAK BUNELA